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बेगूसराय में 2019 के तिहरे हत्याकांड में मुख्य आरोपी को फांसी, न्यायिक इतिहास में पहली बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से फैसला

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बेगूसराय। जिले के सिंघौल थाना क्षेत्र के मचहा गांव में वर्ष 2019 की दिवाली की रात हुए तिहरे हत्याकांड में न्यायालय ने मुख्य आरोपी विकास कुमार उर्फ विकास सिंह को फांसी की सजा सुनाई है। यह मामला चार बीघा जमीन विवाद, गवाही पर दबाव और पूर्व हत्या मामलों से जुड़ा है। विकास सिंह पहले से ही एक अन्य हत्या मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है और वर्ष 2017 में अपनी चाची मुन्नी देवी की हत्या का मामला न्यायालय में लंबित था।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश (तृतीय) ब्रजेश कुमार सिंह की अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बेउर जेल में बंद दोषी को मृत्युदंड का आदेश सुनाया। यह बेगूसराय के न्यायिक इतिहास में पहली बार है जब किसी दोषी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए फांसी की सजा सुनाई गई। अदालत ने फैसला सुनाते समय सभी पक्षों की दलीलों, गवाहों की गवाही और सबूतों को ध्यान में रखा।
मिली जानकारी के अनुसार विवाद वर्ष 2012 में शुरू हुआ था, जब विकास सिंह ने अपने चाचा अरुण सिंह की हत्या की थी। इसके लिए उसे पहले ही आजीवन कारावास की सजा मिल चुकी थी। वर्ष 2017 में अपनी चाची मुन्नी देवी की हत्या का मामला लंबित था। इन दोनों मामलों में मृतक कुणाल सिंह मुख्य गवाह थे। आरोप है कि विकास सिंह अपने भाई कुणाल सिंह को गवाही देने से रोकने के लिए दबाव डाल रहा था। विरोध करने पर उसने अपने साथियों के साथ मिलकर वर्ष 2019 में तिहरे हत्याकांड को अंजाम दिया।
दिवाली की रात, 27 अक्टूबर 2019 को करीब 10 बजे, विकास सिंह ने अपने भाई कुणाल सिंह, भाभी कंचन देवी और 17 वर्षीय भतीजी सोनम कुमारी को गोली मारकर हत्या कर दी। वारदात के समय उसका सामना भतीजे शिवम कुमार से हुआ, जिस पर उसने पिस्तौल सटाकर गोली चलाने की कोशिश की, लेकिन संयोगवश गोली नहीं चली और उसकी जान बच गई। शिवम जब घर के अंदर गया तो उसने अपने माता-पिता और बहन को खून से लथपथ पाया।
अभियोजन पक्ष की ओर से एपीपी राम प्रकाश यादव ने प्रभावी पैरवी की। अदालत में बाबू साहब सिंह, विजय सिंह, डॉ. संजय कुमार, सत्यम कुमार, प्रत्यक्षदर्शी शिवम कुमार और अनुसंधानकर्ता मनीष कुमार सिंह समेत कई गवाहों ने अपनी गवाही दी। गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया और मृत्युदंड की सजा सुनाई।
इस जघन्य अपराध ने स्थानीय समाज में भय और सदमे की स्थिति पैदा कर दी थी। घटना के समय पूरे गांव में डर का माहौल था और लोगों ने पुलिस की तत्काल कार्रवाई की मांग की थी। आरोपी की मानसिकता, उसकी पूर्व हिंसक प्रवृत्ति और गवाहों पर दबाव डालने की कोशिश ने अदालत के समक्ष मामला और गंभीर बना दिया।
विकास सिंह का न्यायिक इतिहास भी चौंकाने वाला है। वर्ष 2012 की हत्या के लिए आजीवन कारावास, वर्ष 2017 की हत्या की लंबित प्रक्रिया और 2019 की तिहरे हत्याकांड ने यह दिखाया कि आरोपी लगातार अपराध की ओर अग्रसर रहा। अदालत ने गवाहों के ब्योरे, घटनास्थल के सबूत और आरोपी के अपराध क्रम को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय सुनाया।
यह फैसला बेगूसराय के न्यायिक इतिहास में मील का पत्थर है, क्योंकि पहली बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए फांसी की सजा सुनाई गई। अदालत ने कहा कि गंभीर जघन्य अपराध में गवाहों की सुरक्षा, सबूतों की प्रामाणिकता और न्याय की प्रक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही यह फैसला यह भी दर्शाता है कि बिहार में न्यायालय समय रहते और प्रभावी कदम उठा रहा है।
इस फैसले के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने कहा कि भविष्य में ऐसे गंभीर अपराधों को रोकने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए सतर्कता बढ़ाई जाएगी।

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